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छातापुर में भक्तिमय माहौल में मां देवी दुर्गा के अष्टम स्वरूप की हुई पूजा अर्चना

छातापुर: सुपौल: सोनू कुमार भगत: शारदीय नवरात्र के आठवें दिन बुधवार को श्रद्धालु महिला पुरुष, कुंवारी कन्याएं व बच्चों द्वारा मां देवी दुर्गा के अष्टम स्वरूप महागौरी की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना प्रखण्ड क्षेत्र में की गयी। छातापुर के सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, चुन्नी दुर्गा मंदिर, गिरिधर पट्टी के मंदिर तथा जीवछपुर दुर्गा मंदिर, तिलाठी दुर्गा मंदिर, डहरिया दुर्गा मंदिर समेत कई दुर्गा मन्दिरों में पूजा अर्चना को लेकर भक्तों की भीड़ सुबह से ही जुटी रही।

भक्तों ने जगत जननी मां देवी दुर्गा के अष्टम स्वरूप महागौरी की पूजा अर्चना कर जीवन मंगल की कामना किया। चुन्नी निवासी पंडित कुला नंद झा ने बताया कि मां देवी दुर्गा के अष्टम स्वरूप की महिमा अपरंपार है। कहा मा देवी दुर्गा के अष्टम स्वरूप महागौरी की पूजा अर्चना करने से भक्तों के पाप नष्ट हो जाते है। बताया गया कि हिन्दूधर्म अनुसार माता की शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी कही गई है। महागौरी की पूजा करने से जीवन में किए सभी पाप नष्ट होते हैं। ऐसी मान्यता है कि मां देवी दुर्गा के अष्टम स्वरूप महागौरी की पूजा अर्चना करने से माता अपने भक्तों पर जीवन भर अपनी दया दृष्टि बनाए रखती हैं।

यदि किसी की विवाह में विलंब हो रही हो तो वह महागौरी की पूजा आराधना उसकी यह समस्या तुरंत दूर हो सकती है। हिंदू शास्त्र के अनुसार इस दिन महागौरी की पूजा के साथ कन्या भोजन कराने से जगदंबिका पूजा को स्वीकार कर सभी मनोकामना को शीघ्र पूर्ण कर देती हैं। पंडित श्री झा ने बताया कि शास्त्र में नवरात्रि की अष्टमी पूजा का विशेष महत्व है।
क्या है मां देवी दुर्गा के अष्टम स्वरूप से जुड़ी पौराणिककथा: मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी को लेकर दो पौराणिक कथाएं काफी चर्चित हैं। पहली पौराणिक कथा के अनुसार पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लेने के बाद मां पार्वती ने पति रूप में भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। तपस्या करते समय माता हजारों वर्षों तक निराहार रही थी।

जिसके कारण माता का शरीर काला पड़ गया था। वहीं माता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने मां पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया और माता के शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर अत्यंत कांतिमय बना दिया। माता का रूप गौरवर्ण हो गया। जिसके बाद माता पार्वती के इस स्वरूप को महागौरी कहा गया। वहीं दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार कालरात्रि के रूप में सभी राक्षसों का वध करने के बाद भोलनाथ ने देवी पार्वती को मां काली कहकर चिढ़ाया था।

माता ने उत्तेजित होकर अपनी त्वचा को पाने के लिए कई दिनों तक कड़ी तपस्या की और ब्रह्मा जी को अर्घ्य दिया। देवी पार्वती से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने हिमालय के मानसरोवर नदी में स्नान करने की सलाह दी। ब्रह्मा जी के सलाह को मानते हुए मां पार्वती ने मानसरोवर में स्नान किया। इस नदी में स्नान करने के बाद माता का स्वरूप गौरवर्ण हो गया। इसलिए माता के इस स्वरूप को महागौरी कहा गया। यहां बता दें मां पार्वती ही देवी भगवती का स्वरूप हैं।

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