उत्तर प्रदेश

Uttarprades: सैकड़ों की संख्या में जिले के पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन

Uttarprades: देवेंद्र कुशवाह: मऊ। बलिया में पेपर लीक मामले में पत्रकारों की गिरफ्तार कर जेल भेजने की घटना से मऊ जनपद के पत्रकारों में काफी आक्रोश है। पत्रकारों की रिहाई और दोषी अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर जिले के पत्रकार लामबंद हैं। सैकड़ों की संख्या में जिले के पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। पत्रकारों ने राज्यपाल को संबोधित पत्रक जिलाधिकारी अरुण कुमार को सौंपकर पत्रकारों की जल्द रिहाई और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। इस दौरान पत्रकारों ने बलिया प्रशासन के विरोध में जमकर नारे लगाए।

पत्रक सौंपने के बाद धरना स्थल पर पत्रकारों ने धरना दिया। धरना स्थल पर बलिया के जिलाधिकारी के जमीर की मृत्यु होने की बात कह सभी ने दो मिनट का मौन भी रखा। जनपद के विभिन्न पत्रकार संगठन इसमें शामिल हुए। पत्रकारों ने हाथ पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। विभिन्न पत्रकार संगठनों की ओर से राज्यपाल के नाम पांच सूत्रीय पत्रक जिलाधिकारी अरुण कुमार को सौंपा गया। जिसमें मांग किया गया कि बलिया के निर्दोष पत्रकार अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह और मनोज गुप्ता को तत्काल रिहा किया जाए। निर्दोष पत्रकारों पर दर्ज मुकदमा तत्काल वापस लिया जाए।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दमन किए जाने की नियत से की गई कार्रवाई के लिए दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। पेपर आउट मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। ताकि आगे से कोई भी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके। साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अविलम्ब जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट बनाया जाए। सच उजागर करने पर बलिया में पत्रकारों को जेल में बंद किया जाना। पत्रकारों को तत्काल रिहा करने के साथ दोषियों के विरूद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह ने कहा कि पत्रकारों को घुटने पर लाने की बलिया प्रशासन की मंशा किसी भी कीमत पर कामयाब नहीं होगी।

कहा कि प्रशासनिक नाकाबंदी कर पत्रकारों की कलम चलने से रोका जा रहा है। मऊ जिले के पत्रकार बलिया के पत्रकारों के न्याय की लड़ाई लड़ते रहेंगे। वरिष्ठ पत्रकार संजय मिश्रा ने कहा कि भारत का चौथा स्तंभ कही जाने वाली मीडिया आज खतरे में है। पत्रकार डरने व डिगने वाले नहीं है। कहा कि अपनी नाकामी छुपाने के लिए बलिया प्रशासन ने बेकसूर पत्रकारों को निशाना बनाया है। पत्रकारों को जेल भेजना लोकतंत्र की भावना से खिलवाड़ है। इस तरह की कार्रवाईयों को पत्रकार बर्दाश्त नहीं करेंगे। बलिया जिला प्रशासन द्वारा साजिश के तहत व्हाट्सएप पर प्रश्नपत्र मंगवाकर मुकदमा कायम करना सरासर गलत है। इस दौरान कई वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने विचार रखे।

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