छत्तीसगढ़प्रदेश

हठधर्मी व तानाशाह सरकार की हार है कृषि कानूनों का वापस होना : माकपा

Advertisement

रायपुर। तीन किसान विरोधी कृषि कानूनों को वापस करने की प्रधानमंत्री की घोषणा आजादी के बाद के सबसे बड़े और शांतिपूर्ण ऐतिहासिक आंदोलन की जीत है, जिसे सरकार और सरकार के पीछे खड़े संगठनों, भाजपा और संघी गिरोह ने खालिस्तानी, पाकिस्तानी, पृथकतावादी, नक्सलवादी आदि-इत्यादि कहकर बदनाम किया था। इस जीत का श्रेय किसानों और इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चे को जाता है।

Advertisement

आज यहां जारी रख बयान में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिवमंडल ने उक्त जीत के लिए किसानों को बधाई देते हुए कहा है कि सरकार ने खुद ही दावा किया है कि इस आंदोलन से सिर्फ दिल्ली को ही प्रतिदिन 3500 करोड़ का नुकसान हो रहा था। जाहिर है कि यदि सरकार पहले दिन ही किसानों की मांग को मान लेती, तो एक साल तक चले इस आंदोलन से होने वाले 13 लाख करोड़ रुपए के नुकसान से बचा जा सकता था। यह सिर्फ दिल्ली के कारोबार का नुकसान है और इससे देश भर में हुए नुकसान की कल्पना की जा सकती है।

माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि सरकार की हठधर्मिता से सिर्फ राष्ट्र को आर्थिक क्षति ही नहीं हुई है, बल्कि आंदोलन के दौरान शहीद हुए 750 से अधिक किसानों और लखीमपुर खीरी में मंत्री के बेटे द्वारा कुचल दिए गए किसानों की मौत भी इसी हठधर्मिता का परिणाम है। यदि सरकार अपनी कारपोरेटपरस्ती को छोडक़र किसानो के साथ संवाद का रास्ता अपनाती और तभी इन कानूनो को वापस ले लेती, तो इन घरों के चिरागों को भी बुझने से बचाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि इन मौतों के लिए जिम्मेदार सरकार को शहीद किसान परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था करना चाहिए।

माकपा नेता ने इस जीत को सरकार की हठधर्मिता की हार बताते हुए कहा है कि संसद में बिना बहस के पारित कराये गए इन कानूनों को वापस लेने का अधिकार भी संसद को है। सरकार को संसद में इन कानूनों को वापस लेना चाहिए और किसानों की बुनियादी मांग एमएसपी की गारंटी पर कानून बनाने और किसान व जनविरोधी बिजली बिल को वापस लेने की भी घोषणा करनी चाहिए।

माकपा ने संयुक्त किसान मोर्चे को इस जीत के लिए बधाई देते हुए कहा है कि माकपा आने वाले दिनों में भी संयुक्त किसान मोर्चे के हर आव्हान कर समर्थन करेगी।

Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button