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गुजरात दौरे पर हैं राष्ट्रपति Ramnath Kovind, नौसैनिक पोत INS वलसुरा को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ दिया

दिल्ली। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) दो दिवसीय गुजरात (Gujarat) दौरे पर हैं. उन्होंने अपने दौरे के दूसरे दिन प्रदेश के जामनगर में शुक्रवार को भारतीय नौसैनिक पोत (INS) वलसुरा को प्रतिष्ठित ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ से सम्मानित किया. अधिकारियों ने बताया कि किसी सैन्य इकाई को युद्ध और शांति दोनों की स्थिति में उसकी विशिष्ट सेवा को मान्यता देते हुए ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किया जाता है. इस अवसर पर राष्ट्रपति के लिए रस्मी समारोह का आयोजन किया गया और उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया

वर्ष 1942 में स्थापित आईएनएस वलसुरा भारतीय नौसेना के लिए प्रमुख प्रशिक्षण पोत है. इसकी जिम्मेदारी भारतीय नौसेना, तटरक्षक और अन्य मित्र राष्ट्रों के अधिकारियों और नाविकों को इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, हथियार प्रणाली और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रशिक्षण देना है.

बीते दिन राष्ट्रपति ने गुजरात विधानसभा सदस्यों को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र में जन प्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्‍वपूर्ण होती है, लेकिन इस बात का महत्‍व अधिक है कि लोग उन्हें अपना भाग्य विधाता मानते हैं. लोगों की आशायें और आकांक्षायें उनसे जुड़ी होती हैं. लोगों की इन आकांक्षाओं को पूरा करना सभी जन प्रतिनिधियों के लिये सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि आजादी और उसका अमृत महोत्सव मनाने के लिए गुजरात से बेहतर स्थान और क्या हो सकता है. गुजरात क्षेत्र के लोग स्वतंत्र भारत की अलख जगाने में अग्रणी रहे हैं. उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में, दादाभाई नौरोजी और फिरोज शाह मेहता जैसी हस्तियों ने भारतीयों के अधिकारों के लिये आवाज उठाई थी.

उस संघर्ष को गुजरात के लोग लगातार मजबूत करते रहे, जो फलस्वरूप महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत की स्वतंत्रता की पराकाष्ठा को पहुंचा. राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी ने न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नेतृत्व प्रदान किया, बल्कि उन्होंने पूरी दुनिया को नई राह भी दिखाई, नये विचार और नया दर्शन दिया. आज विश्व में जहां भी किसी प्रकार की हिंसा होती है, तो बापू के मंत्र ‘अहिंसा’ का महत्‍व समझ में आने लगता है.

गुजरात का इतिहास अनोखा है. यह महात्मा गांधी और सरदार पटेल की भूमि है तथा इसे सत्याग्रह की भूमि कहा जा सकता है. सत्याग्रह का मंत्र पूरी दुनिया में उपनिवेश के विरुद्ध अचूक अस्त्र के रूप में स्थापित हो गया है. बारडोली सत्याग्रह, नमक आंदोलन और दांडी मार्च ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम को न केवल नया आकार दिया, बल्कि प्रतिरोध की अभिव्यक्ति तथा जन आंदोलन की पद्धति को नये आयाम भी दिए

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