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अब गेवरा खदान बंद करने की चेतावनी दी किसान सभा ने, मांगा विस्थापित बेरोजगारों के लिए आउटसोर्सिंग कंपनियों में रोजगार

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कोरबा। कोरबा जिले में एसईसीएल की कोयला खनन परियोजनाओं से विस्थापितों के लिए रोजगार की मांग इस क्षेत्र की एक प्रमुख मांग के रूप में उभर रही है, क्योंकि अपनी जमीन से हाथ धो चुके परिवार आजीविका के साधनों के अभाव में बेरोजगारी का दंश सहने पर मजबूर है। इन विस्थापित परिवारों से एसईसीएल ने रोजगार देने का वादा किया था, जिस पर उसने आज तक अमल नहीं किया है।

कल 1 दिसम्बर को रोजगार एकता संघ, छत्तीसगढ़ किसान सभा और माकपा मिलकर पूर्व घोषणा के अनुसार कुसमुंडा खदान को बंद करने की तैयारी कर रही है, वहीं अब किसान सभा ने 10 दिसम्बर को गेवरा खदान बंदी की चेतावनी भी दे दी है। गेवरा क्षेत्र के विस्थापन प्रभावित गांवों के बेरोजगारों ने किसान सभा के नेतृत्व में मांग की है कि एसईसीएल के अधीनस्थ कार्य कर रही आउटसोर्सिंग कंपनियों में 100% कार्य विस्थापित बेरोजगारों को उपलब्ध कराया जाए। उनका आरोप है कि विस्थापन प्रभावित गांव के बेरोजगारों द्वारा इन कंपनियों में रोजगार के लिए आवेदन भी दिया गया है, लेकिन उन्हें रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। किसान सभा का कहना है कि उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की नैतिक जिम्मेदारी एसईसीएल की है, लेकिन वह इसे पूरा करने से इंकार कर रही है, जिसके कारण उन्हें खदान बंदी आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ रहा है।

किसान सभा ने आज इस संबंध में एक ज्ञापन एसईसीएल के गेवरा कार्मिक प्रबंधक वेंकटेश्वर लू को सौंपा। ज्ञापन सौंपने वालों में बड़ी संख्या में इस क्षेत्र के बेरोजगारों के साथ प्रमुख रूप से जवाहर सिंह कंवर, प्रशांत झा, दीपक साहू, जय कौशिक शामिल थे।

अपने बयान में किसान सभा नेताओं ने कहा है कि एसईसीएल प्रबंधन द्वारा बेरोजगारों को ठेकेदारी में हिस्सा दिए जाने के प्रस्ताव से वे सहमत नहीं है, क्योंकि ठेकेदारी रोजगार का कोई विकल्प नहीं है और न ही इस क्षेत्र के विस्थापित परिवारों की इतनी आर्थिक क्षमता है कि वे ठेकेदारी कर सके। जो किसान परिवार अपनी जमीन से हाथ धो चुके हैं, उन विस्थापित परिवारों की सुनिश्चित आय और बेहतर जीवन के लिए किसान सभा सभी बेरोजगारों के लिए रोजगार की मांग पर संघर्ष कर रही है।

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