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RSS से माफी नहीं मांगी तो एक भी फ़िल्म नहीं चलने देंगे- Javed Akhtar को BJP विधायक की धमकी

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानी RSS और तालिबान की तुलना को लेकर फिल्म गीतकार और लेखक जावेद अख्तर (Javed Akhtar) बुरी तरह फंसते नजर आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने उन पर हमला बोला है और जावेद अख्तर से माफी की मांग की है। भाजपा नेता राम कदम ने कहा है कि जब तक जावेद अख्तर आरएसएस और वीएचपी की तुलना तालिबान से करने वाले अपने हालिया बयानों के लिए माफी नहीं मांगते, तब तक उनकी फिल्में देश में नहीं दिखाई जाएंगी।

हाल ही में एक न्यूज पोर्टल को दिए इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने कहा था कि तालिबान बर्बर हैं, उनकी हरकतें निंदनीय हैं, मगर आरएसएस, विहिप और बजरंग दल का समर्थन करने वाले सभी एक जैसे हैं। जावेद अख्तर की ये टिप्पणियां भाजपा को अच्छी नहीं लगीं और उसने अख्तर पर हमला बोला और कहा कि अगरर आरएसएस तालिबान की तरह होता, तो उन्हें इस तरह के बयान देने की अनुमति भी नहीं होती।

भाजपा विधायक और प्रवक्ता राम कदम ने कहा कि RSS से जुड़े राजनेता सरकार में मामलों के शीर्ष पर हैं। ये नेता राज धर्म का पालन करते हुए देश चला रहे हैं, अगर वे तालिबान की तरह होते तो क्या जावेद अख्तर को ऐसा बयान देने की अनुमति दी जाती। उन्होंने कहा ,यह टिप्पणी करने से पहले उन्हें यह सोचना चाहिए था कि एक ही विचारधारा वाले लोग अब सरकार चला रहे हैं, राज धर्म को पूरा कर रहे हैं। अगर विचारधारा तालिबानी होती, तो क्या वह ये टिप्पणी कर पाते? इससे पता चलता है कि उनके बयान कितने खोखले हैं?’

उन्होंने कहा कि जावेद अख्तर ने इस तरह की टिप्पणी करके उन्होंने देश में गरीब लोगों के लिए काम करने वाले आरएसएस कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। अगर वह उनसे माफी नहीं मांगते हैं तो हम उनकी फिल्मों को इस देश में नहीं चलने देंगे। बता दें कि भाजपा की युवा शाखा ने शनिवार को जावेद अख्तर के जुहू स्थित आवास तक विरोध मार्च निकाला, जिसमें उनके बयान के लिए माफी की मांग की गई। 

बीजेपी युवा शाखा के एक नेता ने कहा कि हमें लगता है कि जावेद अख्तर मानसिक रूप से सही नहीं हैं। इस देश ने उन्हें सब कुछ दिया है। आरएसएस जमीनी स्तर पर लोगों की मदद करता है और उन्होंने उनकी तुलना तालिबान से की है। यह अस्वीकार्य है। अगर वह माफी नहीं मांगते हैं तो उनके खिलाफ हमारा आंदोलन और तेज हो जाएगा।

जावेद अख्तर ने कथित तौर पर यह भी कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जनसंख्या भी काफी हद तक धर्मनिरपेक्ष है, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो आरएसएस और वीएचपी जैसे संगठनों का समर्थन करते हैं और नाजियों के समान विचारधारा रखते हैं।

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