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लापरवाही की हदें पार: मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 27 लोगों को हुआ संक्रमण, 15 की आंखें निकालनी पड़ी

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मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन के बाद आंख गंवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बुधवार को मेडिकल कॉलेज में गंभीर रूप से संक्रमित नौ और पीड़ितों की आंख निकालनी पड़ी। इससे आंख गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। बुधवार को नौ नए मरीज मेडिकल कॉलेज में भर्ती किए गए हैं। जांच के बाद इनकी आंख निकालने पर फैसला होगा

ऑपरेशन कर रहे डॉक्टरों के अनुसार संख्या बढ़ सकती है। दूसरी ओर, 22 नवंबर को ऑपरेशन कराने वाले सभी लोगों में संक्रमण की आशंका के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ रखा है। लगभग पचास पीड़ितों के बारे में न तो विभाग के पास पर्याप्त जानकारी है और न ही उनकी कोई खोज-खबर ली जा रही है। 

घटना सामने आने के तीन दिन बाद बुधवार को सीएस जागे और आई अस्पताल को पत्र भेजकर पीड़ितों का ब्योरा व अस्पताल से जुड़े दस्तावेज मांगे। वह भी तब जब मुख्यालय ने उनसे पूरी जानकारी तलब की। इस बीच, डीएम ने पीड़ितों को मुख्यमंत्री सहायत कोष से मुआवजा देने की बात कही है। 

इससे पहले, मंगलवार को दो पीड़ितों की आंख निकाली गई थी, जबकि ऑपरेशन के दूसरे दिन 22 नवंबर को आई अस्पताल ने मामला दबाने के लिए आनन-फानन में चार मरीजों की आंख निकाली थी। बुधवार को मुजफ्फरपुर के साथ ही पटना में यह मामला गरमाया रहा। स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह सहित कई अन्य आला अधिकारियों के फोन आने के बाद सीएस डॉ. विनय कुमार शर्मा टीम के साथ अस्पताल पहुंचे

उन्होंने अस्पताल के सहायक प्रशासक दीपक कुमार से लंबी पूछताछ की। सीएस ने अस्पताल में तैनात डॉक्टर से लेकर पारा स्टाफ तक की पूरी जानकारी मांगी है। उनकी शैक्षणिक योग्यता से लेकर वेतन या मानदेय तक के कागजात दो दिनों के अंदर उपलब्ध कराने को कहा। बाद में पूरे मामले की जांच कर रहे एसीएमओ की टीम भी पहुंची।

दो मरीज बिना आंख निकलवाए चले गए

बुधवार की सुबह लगभग नौ बजे ही मेडिकल में गहमा-गहमी बढ़ गई थी। डॉक्टरों की टीम के साथ ही कई प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे। 11 लेागों का ऑपरेशन होना था। पहले तो कई ने आंख निकलवाने से मना कर दिया। बाद में किसी तरह तैयार हुए। मगर दो मरीज बिना बताए अस्पताल से चले गए

बाद वालों को भी आ रही आंख में दिक्कत

आई अस्पताल में 22 नवंबर को ऑपरेशन करवाने वालों की आंख खराब होने का सिलसिला अभी थमा नहीं है और इसके बाद पांच दिन तक चले ऑपरेशन में भी गड़बड़ी सामने आ रही है। 23 से 27 नवंबर तक ऑपरेशन कराने वाले कुछ मरीजों की आंख में दिक्कत सामने आई है। ये मरीज सदर अस्पताल और निजी अस्पतालों तक पहुंच रहे हैं। हालांकि, निजी अस्पताल इनका इलाज करने से कतरा रहे हैं।

ओपीडी से दवा दुकान तक बंद, पसरा सन्नाटा

मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में बुधवार ओपीडी भी बंद हो गई। बड़ी संख्या में आंख दिखाने के लिए आए मरीजों का लौटना पड़ा। कई वैसे लोग भी पहुंचे थे जिन्हें पहले ही ऑपरेशन की तारीख दी गई थी। अस्पताल के प्रशासनिक भवन में गहमा-गहमी बनी रही मगर ओटी से लेकर वार्ड तक में सन्नाटा पसरा रहा।

पीड़ितो को दिया जाएगा मुआवजा: डीएम

डीएम प्रणव कुमार ने कहा, ‘पीड़ितों को मुख्यमंत्री राहत कोष से मुआवजा दिया जाएगा। पीड़ितों के परिजनों की मांग पर प्रशासन इसकी तैयारी कर रहाह है। इसके लिए पीड़ितों को आवेदन करना होगा। फिलहाल जांच रिपेार्ट का इंतजार किया जा रहा है।’

अस्पताल प्रबंधन को दिया गया है नोटिस: सीएस

सीएस डॉ. विनय कुमार ने कहा, ‘पूरे मामले की जांच की जा रही है। इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी गई है। उस जांच के अलावा भी कई बिंदुओं पर अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया है। अस्पताल में मौजूद संसाधन, डॉक्टर और पारा मेडिकल स्टॉफ की शैक्षणिक योग्यता सहित कई बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है।’

इनकी बुधवार को निकाली गई आंख

– भरत प्रसाद सिंह
– प्रमीला देवी
– प्रेमा देवी
– भरत पंडित
– शत्रुघ्न महतों
– भरत पासवान
– सुखदेव सिंह
– मुबरखा खातून
– जमीना खातून

अस्पताल के खिलाफ एफआईआर का निर्देश, जांच टीम गठित

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने मुजफ्लरपुर जिला प्रशासन और सिविल सर्जन को इस मामले में संबंधित अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है। विभाग के निर्देश पर आई अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर को सील कर दिया गया है और ऑपरेशन में प्रयोग किए जाने वाले सभी उपकरणों और ऑपरेशन थियेटर से सैंपल लेकर इंफेक्शन की जांच के लिए माइक्रोबॉयोलॉजी लैब में भेजा गया है।

चार सदस्यीय जांच टीम गठित, जांच रिपोर्ट मांगी गयी

विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस मामले को लेकर चार सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। जांच टीम में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुभाष प्रसाद, एसकेएमसीएच, मुजफ्फरपुर के नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार सिंह, सदर अस्पताल, मुजफ्फरपुर की नेत्र चिकित्सक डॉ. नीतू कुमारी व प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. हसीब असगर शामिल हैं। विभाग ने जांच टीम को विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

पैन ऑप्थॉलमाइटिस के शिकार हुए मरीज

जानकारी के अनुसार मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले 17 मरीजों की जानकारी अबतक हुई है। ये मरीज आंखों में पैन ऑप्थॉलमाइटिस नामक बीमारी के शिकार हुए। माइक्रोबॉयोलॉजी जांच के लिए भेजे गए सैंपल की जांच रिपोर्ट 72 घंटे में मिलने की उम्मीद है। सैंपल को भेजे हुए अबतक 24 घंटे हुए हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार ऑपरेशन थियेटर या सर्जिकल आइटम में पहले से ही इंफेक्शन होने की आशंका है। गौरतलब है कि गत 22 नवंबर को कुल 65 मरीजों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था। मरीजों में खगड़िया, समस्तीपुर, मोतिहारी व अन्य जिलों से आए मरीज भी शामिल हैं

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