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J&K Terror Funding Case: एनआईए कोर्ट ने हाफिज सईद और यासीन मलिक समेत 15 के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए

J&K Terror Funding Case: नई दिल्ली: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट की स्पेशल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कोर्ट ने लश्कर-ए-तयैबा के फाउंडर आतंकी हाफिज सईद और हिजबुल मुज्जाहिद्दीन के चीफ सैयद सालाहुद्दीन, कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक, शाब्बीर शाह, मसरत आलम समेत अन्य के खिलाफ UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के विभिन्न धाराओं के तहत आरोप करने का आदेश दिया है. जम्मू और कश्मीर राज्य को परेशान करने वाली आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों से संबंधित एक मामले में स्पेशल कोर्ट ने ये आदेश दिया है

कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता और यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना, गैरकानूनी गतिविधियां आदि से संबंधित धाराओं के तहत कश्मीरी राजनेता और पूर्व विधायक राशिद इंजीनियर, व्यवसायी जहूर अहमद शाह वटाली, बिट्टा कराटे, आफताब अहमद शाह, अवतार अहमद शाह, नईम खान, बशीर अहमद भट, उर्फ ​​पीर सैफुल्ला और कई अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का भी आदेश दिया. टेरर फंडिंग मामले की सुनवाई कर रही NIA की स्पेशल कोर्ट के जज परवीन सिंह ने अपने आदेश में जम्मू-कश्मीर में 2017 में हुई आतंकवादी एवं अलगाववादी गतिविधियों को सुनियोजित साजिश माना है. कोर्ट ने कहा कि आतंकी फंडिंग के लिए पाकिस्तान और उसकी एजेंसियों का इस्तेमाल किया और इस काम के लिए राजनयिक मिशन का भी इस्तेमाल किया गया

गवाहों ने बयान दिया है कि एपीएचसी, उसके गुटों और जेआरएल का केवल एक ही उद्देश्य था और वह था अलगाव. गवाहों ने आरोपी शब्बीर शाह, यासीन मलिक, जहूर अहमद शाह वटाली, नईम खान और बिट्टा कराटे को ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) और जेआरएल से जोड़ा. साथ ही बताया कि रशीद से लेकर जहूर अहमद शाह वटाली एपीएचसी और पाकिस्तानी एजेंसियों के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं. हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश में जो कुछ भी व्यक्त किया गया है वह प्रथम दृष्टया राय है

आतंकवाद के लिए पैसा पाकिस्तान और उसकी एजेंसियों से भेजा गया था. एनआईए कोर्ट ने कहा कि आतंकी फंडिंग के लिए पैसा भी घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों और आरोपी हाफिज सईद द्वारा भेजा गया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), हिज्बुल मुजाहिदीन (HM), जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने पाकिस्तान के ISI के समर्थन से, नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमला करके घाटी में हिंसा को अंजाम दिया

आगे आरोप लगाया कि 1993 में अलगाववादी गतिविधियों को राजनीतिक रूप देने के लिए ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) का गठन किया गया था. एनआईए ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि यह जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया गया है. घाटी में सुरक्षा बलों पर पथराव, स्कूलों को जलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के माध्यम से व्यवधान पैदा करने के लिए एक बड़ी साजिश की गई है.

इस सूचना पर गृह मंत्रालय ने एनआईए को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था. इसके बाद एनआईए ने वर्तमान मामला आईपीसी की धारा 120बी, 121, 121ए और यूएपीए की धारा 13, 16, 17, 18, 20, 38, 39 और 40 के तहत दर्ज किया गया था. एनआईए ने आगे कहा कि जांच के दौरान यह भी पता चला कि एपीएचसी और अन्य अलगाववादी आम जनता, विशेष रूप से युवाओं को हड़ताल करने और हिंसा का सहारा लेने के लिए उकसाते हैं, खासकर सुरक्षा बलों पर पथराव करने के लिए. यह भारत सरकार के प्रति जम्मू-कश्मीर के लोगों में असंतोष पैदा करने के लिए किया गया था. एनआईए ने यह भी कहा कि जांच से पता चला है कि अलगाववादी जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के जरिए अशांति फैलाने और अलगाववादियों को समर्थन करने के लिए सभी संभावित स्रोतों से धन जुटा रहे थे. अलगाववादियों को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों से धन मिल रहा था

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