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माकपा का 23वां महाधिवेशन संपन्न, सीताराम येचुरी पुनः महासचिव निर्वाचित, संजय पराते आमंत्रित सदस्य

कन्नूर (केरल)। भाजपा को राजनैतिक-वैचारिक-सांस्कृतिक व सामाजिक रूप से अलग-थलग करने और आगामी चुनावों में भाजपा विरोधी मतों के विभाजन को रोककर उसकी पराजय सुनिश्चित करने तथा स्थानीय मुद्दों पर जुझारू आंदोलन छेड़ते हुए पार्टी संगठन और वामपंथी-जनवादी आंदोलन को मजबूत बनाने के आह्वान के साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का केरल के कन्नूर में चल रहा 23वां महाधिवेशन आज यहां संपन्न हो गया। महाधिवेशन ने 85 सदस्यीय केंद्रीय समिति का भी चुनाव किया,

जिसने सीताराम येचुरी को पुनः अपना महासचिव चुना। केंद्रीय समिति में 15 महिलाएं हैं तथा 10 राज्यों के 17 नए चेहरों को स्थान दिया गया है। इसके अलावा दो लोगों को स्थायी आमंत्रित और 3 लोगों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में जगह दी गई है। छत्तीसगढ़ से माकपा राज्य सचिव संजय पराते को केंद्रीय समिति में आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।

नवनिर्वाचित केंद्रीय समिति ने 17 सदस्यीय पोलिट ब्यूरो, जो पार्टी का सर्वोच्च राजनैतिक निकाय है, का भी चुनाव किया। माकपा पोलिट ब्यूरो में प्रकाश करात, पिनारायी विजयन, बी वी राघवुलु, माणिक सरकार, बृंदा करात, के बालकृष्णन, एम ए बेबी, सूर्यकांत मिश्र, मो. सलीम,

सुभाषिणी अली, जी रामकृष्णन, तपन सेन, नीलोत्पल बसु, रामचंद्र डोम, ए विजयराघवन तथा अशोक ढवले शामिल हैं। माकपा के इतिहास में पहली बार किसी दलित नेता (रामचंद्र डोम) को पोलिट ब्यूरो में स्थान मिला है। आगामी तीन वर्षों के लिए चुनी गई यह केंद्रीय समिति और पोलिट ब्यूरो महाधिवेशन के फैसलों को लागू करने के लिए जिम्मेदार होगी।

इसके पूर्व महाधिवेशन ने पार्टी के पोलिट ब्यूरो सदस्य प्रकाश करात द्वारा पेश राजनीतिक-सांगठनिक रिपोर्ट को भी पारित किया। इस रिपोर्ट में मार्क्सवादी-लेनिनवादी सिद्धांतों के आधार पर पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को चिन्हित किया गया है,

जिस पर केंद्रीय समिति आने वाले दिनों में अमल करेगी। रिपोर्ट में फासीवादी हिंदुत्व की संगठित ताकत का मुकाबला करने के लिए पार्टी को राजनैतिक-वैचारिक-सांगठनिक रूप से मजबूत करने और इसके लिए पार्टी सदस्यता की गुणवत्ता को मजबूत करने तथा बड़े पैमाने पर नौजवानों और महिलाओं को पार्टी की ओर आकर्षित करने की योजना बनाई गई है। माकपा का मानना है कि जन संघर्षों और वर्गीय संघर्षों को मजबूत करके ही पार्टी के राजनैतिक प्रभाव और उसके जनाधार में विस्तार किया जा सकता है। पार्टी ने आम जनता से जीवंत रिश्ते कायम करने के लिए जन आंदोलनों को मजबूत करने पर जोर दिया है।

पत्रकारों से चर्चा करते हुए माकपा नेता प्रकाश करात ने हिंदुत्व और हिन्दू के अंतर को स्पष्ट किया। उनका कहना है कि हिंदुत्व एक राजनैतिक परियोजना है और इसका हिन्दू धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ-भाजपा आज हिंदुत्व की विचारधारा को राज्य की विचारधारा बनाने की कोशिश कर रही है, जिसका हर स्तर पर मुकाबला किया जाएगा, क्योंकि यह संविधान और हमारे देश के धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक चरित्र को नष्ट कर देगी। उन्होंने कहा कि देश पर थोपी जा रही हिंदुत्व की विचारधारा आज देश के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

पार्टी महाधिवेशन के समापन के अवसर पर चुने हुए 2000 ‘रेड वालंटियर्स’ का मार्च आयोजित किया जा रहा है। इस मौके पर होने वाली विशाल आम सभा को सीताराम येचुरी, प्रकाश करात, पिनारायी विजयन, माणिक सरकार, बृंदा करात आदि ने संबोधित करेंगे।

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