छत्तीसगढ़प्रदेश
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छात्र युवा मंच ने स्वामी विवेकानंद जी के जयंती पर आगाज किया प्राकृतिक सुरक्षा अभियान

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बड़ते प्रदुषण को देखते हुए छात्र युवा मंच चला रहा है प्राकृती सुरक्षा अभियान | आजकल पानी पाउच, डिस्पोजल, पोलीथिन का प्रयोग ज्यादा होते जा रहा है जो की प्रकृति और पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है |

डिस्पोजल, पानी पाउच, और पॉलिथिन प्राकृती और पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है साथ मे यहा मिटटी की उपजाऊता को भी नष्ट करता है यह मनुष्य तथा जीव जन्तु के लिए भी खतरनाक है |

छात्र युवा मंच के द्वारा प्रदेश स्तर पर यह अभियान चलाया जा रहा है |

प्रकृति सुरक्षा अभियान के प्रदेश सह प्रभारी प्रसंजीत सरकार का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भले की पॉलीथिन पर रोक लगा दी गई है, लेकिन इस शहर में इसका कोई असर नहीं दिख रहा। लोगों को भी इसके घातक प्रभाव की तनिक भी परवाह नहीं है। जिस कारण शहर के सभी दुकानों में पॉलीथिन का अंधाधुंध प्रयोग हो रहा है। पॉलीथिन से कई समस्याएं खड़ी हो रही है। शहर की गलियां हो या नालियां हर जगह पॉलीथिन समस्या बनी हुई है। पॉलीथिन नालियों में फंस कर उसे अवरुद्ध कर दे रही हैं।

कई दुकानदारों ने बताया कि ग्राहक ही पॉलीथिन का डिमांड करते हैं। दुकानदार भी पतली पॉलीथिन का पैकेट जो 10 से 15 रुपये में मिल जाता है, उसका इस्तेमाल करते हैं। जबकि स्टैंडर्ड 40 माइक्रान की पॉलीथिन की कीमत लगभग दोगुनी है। थोड़ी सी लालच के चलते दुकानदार भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में अपनी ओर से कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। कई बार आवारा पशु कूड़े करकट में मुंह मारकर पेट की आग बुझाने की कोशिश में पॉलीथिन खा जाते हैं। जिससे उन्हें मौत के मुंह में जाना पड़ता हैं। रोजाना एकत्रित होने वाले वेस्टो में करीब 60 फीसद वेस्ट केवल प्लास्टिक के डिस्पोजल गिलास व पानी के खाली पाउच का है |

यहा अभियान कांकेर जिला के पंचायत स्तर पर चलाया जा रहा है जिसमे जयपुर पंचायत एंव रामकृष्णपुर भी सामील है | आवेदन देने सुमन ढाली, अमित दास, जयंत मिस्त्री, सम्पत सिकदार, सुभोजीत बाला, प्रसंजीत सरकार, निलकमल बड़ाई, अजय मजूमदार उपस्थित थे

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