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बिहार

देखिए डीएम साहब, इस हेडमास्टर साहब के लिए कोरोना गाइड लाइन कोई मायने नहीं रखती

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राकेश यादव:-बछवाड़ा (बेगूसराय):- केन्द्र से लेकर राज्य सरकारें व विभिन्न गैर सरकारी संगठन कोरोना जागरूकता को लेकर काफी संवेदनशील है। मगर हाई स्कूल नारेपुर के दृश्य कुछ और हीं बयां करती हैं। सरकार द्वारा जारी कोरोना गाइड लाइन व विभिन्न प्रकार के नियम निर्देश कोई मायने नहीं रखती। नारेपुर हाईस्कूल में इन दिनों इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं से प्रयोगिक परीक्षा ली जा रही है।

लेकिन परीक्षा के दौरान कोरोना गाइडलाइंस का पालन नही किया जा रहा है। बताते चलें कि सरकार के द्वारा वैश्विक महामारी को लेकर गाइडलाइंस जारी किया गया कि विद्यालय में छात्र-छात्राओं की पच्चास प्रतिशत उपस्थिति होनी चाहिए। वहीं एक छात्र से दुसरे छात्र की दुरी रहने के साथ ही मास्क का प्रयोग किया जाना चाहिए। लेकिन परीक्षा के दौरान एक बैंच पर तीन तीन छात्र-छात्राएं बैठे देखे गए। वहीं कुछ छात्र-छात्राएं कोरोना गाइडलाइंस के पालन करते हुए मास्क तो लगा रखा था,

पर सोशल डिस्टेंस का घोर अभाव देखने को मिला। अधिकांश छात्र छात्राएं तो बिना मास्क लगाये हीं परिक्षा में शामिल थे। उल्लेखनीय है कि बिहार बोर्ड के निर्देश पर होम सेंटर पर ही प्रैक्टिकल की परीक्षा लिया जाना है, जो 20 जनवरी तक चलेगी।परीक्षा को लेकर विद्यालय परिसर में ना तो सेनिटाइजर की व्यवस्था किया गया था, और न ही कोरोना गाइडलाइंस का कोई पालन नही किया गया था। विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामकृष्ण चौधरी नें बताया कि कोरोना महामारी को लेकर दो शिप्ट में प्रयोगिक परीक्षा लिया जा रहा है।

जिस छात्र-छात्राओं को सर्दी खांसी या बुखार जैसी किसी प्रकार का शिमटम् है। वैसे छात्र छात्राओ को अलग परिक्षा ली जा रही है। प्रत्येक शिफ्ट के लिए परीक्षार्थियों की सूची स्कूल स्तर पर तैयार कर प्रकाशित किया गया है। उन्होने बताया कि नारेपुर हाई स्कूल व उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दादुपुर दोनों विद्यालय का परीक्षा हाई स्कूल नारेपुर में हीं लिया जा रहा है। हाई स्कूल नारेपुर के सांईस विषय के कुल 270 व उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दादुपुर के कुल 190 छात्र-छात्रा में से 205 छात्र-छात्राओं नें प्रयोगिक परिक्षा में भाग लिया।

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